पृथ्वी शॉ की धुआंधार बल्लेबाजी से धराशायी हुई कैरेबिआई टीम

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हैदराबाद में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच में टीम इंडिया ने विंडीज को 2-0  से धूल चटा दी. दिलचस्प बात यह है कि दोनों टेस्ट मैच भारत ने तीन दिन के भीतर ही जीत लिए. जिस अंदाज में भारत ने राजकोट में अपना पहला टेस्ट जीता था, उससे यह साफ हो गया था कि हैदराबाद टेस्ट  में क्या  होगा.

जीत से इतर क्रिकेट प्रेमियों की नजरें भारतीय क्रिकेट की नई सनसनी पृथ्वी शॉ  का लगातर पीछा कर रही थीं. विंडीज के साथ हुए अपने पहले इंटरनेशल क्रिकेट टेस्ट में शॉ ने राजकोट में शतक लगाकर भारतीय किक्रेट प्रेमियों के दिल में अपने लिए जगह बनाई , जिसके बाद से पृथ्वी का दूसरा टेस्ट मैच देखने के लिए भी भारतीय किक्रेट प्रेमी पलके बिछाए थे. जिनको पृथ्वी ने निराश न करते हुए हैदराबाद में 70 और नाबाद 33 की पारी खेली .

पृथ्वी शॉ  की इस धुआंधार बल्लेबाजी के लिए उन्हें मैन ऑफ द सीरीज बनाया गया. उनके  इस कारनामे के साथ ही उनकी तुलना किक्रेट के भगवान सचिन तेंदुलकर से की जाने लगी है कि अपने वक्त में तेंदुलकर भी इस जैसा प्रदर्शन दिखाने में कामयाब नहीं थे.

बता दें कि पृथ्वी शॉ ने 2 टेस्ट की 3 पारियों में 118.50 के औसत से 237 रन बनाए. और वह दोनों टीमों में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे. 1  शतक और 1 अर्धशतक के साथ. जाहिर कि पृथ्वी को दूर-दूर तक मैन ऑफ द सीरीज के लिए कोई चुनौती देने वाला खिलाड़ी नहीं था. पृथ्वी ने ऐसा आगाज किया कि दुनिया भर में उनके खेल की चर्चा हो रही है.

खत्म हुई सीरीज में मैन ऑफ द सीरीज का पुरस्कार झटकने के साथ ही पृथ्वी दुनिया के सिर्फ दसवें ऐसे खिलाड़ी बन गए, जिन्होंने करियर की पहली ही सीरीज में मैन ऑफ द सीरीज का खिताब अपनी झोली में डाला. चलिए तेजी से नजर दौड़ा लीजिए किस-किस खिलाड़ी ने कब यह कारनामा किया.