अब पेरेंट्स बताएंगे क्या करते है घर में उनके बच्चे

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घर में रहते हुए आपका बच्चा हमेशा मोबाइल या फिर कंप्यूटर पर लगा रहता है,पढ़ाई पर ध्यान नहीं देता, उसे आसान से सवालों के जवाबों का भी पता नहीं होता, और वहीं जब इन बातों के बारे में अभिवावकों से उनके दोस्त आदि बच्चों के प्रोग्रेस रिपोर्ट पूछते है तो वह  उसकी गिरती प्रोग्रेस रिपोर्ट का सारा ठीकरा स्कूल के सर फोड़ देते है, लेकिन अब ऐसा कुछ भी अभिभावक नहीं कर पाएंगे.

अब बच्चों से जुड़े आचार, व्यवहार और पढ़ाई को लेकर अक्सर स्कूलों पर ठीकरा फोड़ने वाले अभिभावकों को लेकर सरकार ने भी कुछ सबक सिखाने की ठानी है. इस सबक में वह अब अभिभावकों से एक सेल्फ असेसमेंट (स्वयं का आंकलन) करावाएंगी, जिसमें उन्हें अपने बच्चों के व्यवहार व दिनचर्या से जुड़ी जानकारी देनी  होगी. हालांकि इसका एक मकसद बच्चों पर ध्यान न देने वाले अभिभावकों को जगाना भी है, ताकि पेरेट्स अपने बच्चों पर गंभीरता पूर्वक ध्यान दे.

फिलहाल प्रयोग के तौर पर अभी इसकी शुरुआत देश के कुछ ही चुनिंदा केंद्रीय विद्यालयों में की गई है, लेकिन प्रयोग कारगर रहा, तो इसे देश के सभी स्कूलों में लागू करने की योजना है. इस पूरी कवायद में शामिल अधिकारियों के मुताबिक, इसके जरिए बच्चों में चरित्र निर्माण व व्यक्तित्व विकास के उस बीज को बोना है, जो लगातार उनसे गायब होते जा रहे है. लेकिन यह तभी संभव होगा, जब इनमें स्कूल के साथ अभिभावक भी ध्यान देंगे.