मानसिक रोगों की भयावह स्थिति में भारत, हर दूसरा नागरिक है इसकी चपेट में 

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हानिकारक चीजे छोटी मात्रा में मिले या बढ़ी हुई मात्रा में लाभ से ज्यादा नुकसान ही पहुंचाती है. यह कथन आजकल की व्यस्त जीवनशैली पर बिल्कुल सटीक बैठता है, क्योंकि आज भले ही हम आर्थिक रुप से काफी सुदृढ़ हो चुके है पर वही दूसरी तरफ कहीं न कहीं मानसिक रुप से हमने अनेक अवसादों को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना लिया है. जिसके कारण आज इंसान की औसत मृत्यु दर 70-80साल रह गई है.

हाल ही में हुई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज (निमहांस) की रिसर्च स्टडी में पाया गया है कि भारत में मानसिक रोग एक भयावह स्थिति में पहुंच गया है. रिसर्च के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत की कुल आबादी का 13.7 प्रतिशत यानि लगभग 17 करोड़ लोग कई प्रकार के मानसिक रोगों का शिकार हैं. इस स्टडी के बाद यह निष्कर्ष सामने आया है की भारत में अनुमानित 15 करोड़ लोगों को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता है.

 निमहांस के अध्ययन में क्या-क्या निकला ?

2014 में निमहांस ने देश में मनोरोगियों की संख्या का पता लगाने का जिम्मा लिया था . इस अध्ययन के तहत देश के 12 राज्यों से लगभग 35 हजार लोगों का सैंपल इकट्ठा किया गया. जिसमें कर्नाटक के कोलार इलाके में मनोरोग के सभी पक्षों जैसे डिसॉर्डर, तंबाकू संबंधित डिसॉर्डर, गंभीर मनोरोगों, अवसाद, एंजायटी और  फोबिया आदि पर पायलट स्टडी की गई.

शहरी इलाकों में ज्यादा मानसिक रोगी

निमहांस के अध्ययन में यह भी पाया गया है कि शहरी इलाकों में मानिसक रोग से ग्रस्त लोगों की संख्या ज्यादा है। शहरों में कई लोग सिजोफ्रेनिया, मूड डिसॉर्डर्स, न्यूरोटिक और तनाव से जुड़े डिसॉर्ड्स के शिकार हैं.

क्या है कारण मानसिक अवसाद के

रिसर्च में माना गया है कि मानसिक अवसाद का कारण आजकल की  भागदौड़ भरी जीवनशैली, हद से ज्यादा तनाव, भावनात्मक समस्याएं,  सपोर्ट सिस्टम की कमी और लाइफ  में पेश आने वाली आर्थिक चुनौतियां आदि वजह है.

कैसे आए कमी इन मामलों में

निमंहास की रिसर्च के सामने आने पर विश्व स्वास्थय संगठन ने माना है कि भारत में मानसिक अवसाद की स्थिति बेहद गंभीर है, संगठन का मानना है कि देश में मानिसक रोग विशेषज्ञों का अभाव है, साथ ही इसके लिए ज्यादा संस्थान भी नहीं हैं. मानसिक रोग की दवाओं की सप्लाई भी कम है अगर सरकार को इस समस्या से लड़ना है तो इसके  लिए सरकार को और धन मुहैया कराने की जरूरत है, जिससे देश में अच्छे मेंटल हॉस्पिटल बन सके .