संतान की लंबी आयु का व्रत अहोई,जाने कैसे होती है इसके व्रत की पूजा

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संतान  की खुशी से बढ़ कर माता पिता के लिए कोई भी चीज प्यारी नहीं होती,वह हमेशा चाहते है कि उनकी संतान दिन  दुगनी रात चौगनी तरक्की करे. इसलिए तो कहते पुत्र कुपुत्र हो सकता है पर माता कभी कुमाता नहीं हो सकती . इसी बात को सच करने के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है,तो संतान की लंबी उम्र और उसकी तरक्की के लिए कार्तिक कृष्ण अष्टमी व्रत को रखा जाता है.

इस साल यह व्रत बुधवार को यानि आज मनाया जाएगा. ऐसी मान्यता है कि अहोई अष्टमी का व्रत करने से अहोई माता खुश होकर बच्चों की सलामती का आशीर्वाद देती हैं. संतान की सलामती से जुड़े इस व्रत का बहुत महत्व है. इस व्रत को हर महिला अपने बच्चे के स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए करती हैं. कुछ महिलाएं इस व्रत को संतान की प्राप्ति के लिए भी करती हैं.

कैसे की जाती है पूजा

इस दिन महिलाएं प्रातः उठकर स्नान ध्यान करके एक मिट्टी के मटके में जल भरकर माता अहोई की पूजा करती हैं. पूरे दिन निराजल व्रत रख कर तारे देखकर इस व्रत को तोड़ने की प्रथा है. माता अहोई को पूरी, हलवा और चना का भोग लगाते हैं. माता के भोग लगाने के बाद आरती और हवन किया जाता है. अहोई माता की व्रत कथा का लाभ यह होता है कि संतान चाहे वह पुत्र हो या पुत्री उसके ऊपर आने वाले समस्त संकटों का विनाश हो जाता है. संतान दीर्घायु होती है. किसी भी प्रकार के दैहिक, दैविक और भौतिक संताप का नाश होता है.